श्रीमद्भागवत गीता एक स्वर्णिम ग्रंथ है-रविवारीय चिंतन (shri madbhagvat geeta a golden book)
अपना अपना विचार है और उसके अभिव्यक्त होने की भी अलग अलग शैली होती है। इसलिये किसी के कुछ लिखने और पढ़ने पर उस आदमी के आंतरिक मनस्थिति की भी जानकारी मिल जाती है। इस देश की सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग पढ़ते कम हैं लिखने और कहने के लिये लालायित अधिक रहते...
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दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
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[30 May 2010 03:54 AM]



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