मयखाने में '' ज़िन्दगी है क्या लट्टू या लड़की ....?"
फिल्म ' सत्यकाम ' के बिना अधूरा है हिंदी सिनेमा का इतिहास । ऋषिकेश मुख़र्जी के निर्देशन में बनी ये संवेदनशील फिल्म बात-बात में कुत्तों का खून पीने वाले धरम जी के होम -प्रोडक्शन की पेशकश थी । अगर आपने नहीं देखी तो हिंदी फ़िल्में देखते ही क्यों हैं साहिब...
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मुनीश ( munish )
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[30 May 2010 03:46 AM]



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