मंज़ूर सेठ, सुरैया, नूरजहां और वो पुरानी हवेली।।
रेडियोवाणी पर अमूमन हम एक गाना सुनवाते हैं और बातें उससे जुड़ी होती हैं। ये पोस्ट हमारे रोज़मर्रा के सांचे से अलग है। यहां बीते वक्त का एक मार्मिक किस्सा है, जिसमें समाए हैं कुछ गाने। सोचा ये था कि बिना गानों वाली पोस्ट होगी पर आखिर में हम एक...
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yunus
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[30 May 2010 03:33 AM]



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