सवाल ज़मीन का

युवा दखल सोचो, करो कुछ भी..जमीन हमारी ही है!!अशोक मालवीयसरकार हो या पूंजीवादी ताकतें, इन्होंने कभी भी आदिवासियों को उनका हक नहीं देना चाह है? लेकिन जब जनाक्रोश एक सैलाब का रूप धारण कर लेता तो इसकी दहशत की वजह से इनके हक को दर्शाने वाले कानून तो बना दिये जाते है।... [पूरी पोस्ट]
writer अशोक कुमार पाण्डेय

युवा दखल

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[30 May 2010 02:44 AM]

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