नहीं है ईमानदारी हिंदी पत्रकारिता में
हिंदी पत्रकारिता जिसने आज़ादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका का निर्वहन किया। वह आज कहीं दिखाई नहीं देती। समाज को जाग्रत करने तथा उसे पाखंडों से निकालने की अपेक्षा पत्रकारिता समाज को गलत दिशा में ले जा रही है। कभी सम्मान का यह पेशा अब दलालों, पूंजीपतियों तथा...
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डा. महाराज सिंह परिहार
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[29 May 2010 22:28 PM]



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