अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [स्थाई ...
पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैस्मान्हत्वैतानाततायिन:। तस्मान्नाहो वयं हंतुं धार्तराष्ट्रांसबान्धवान। स्वाज्नं हि कथं हत्वा सुखिन: स्याम माधव ॥36॥ अनुवाद:- वध करने के योग्य इन दुष्टों को मारकर हमें पाप ही लगेगा। इसलिए, हे कृष्ण! हम अपने ही भाईयों, इन धृतराष्ट्र...
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[29 May 2010 20:30 PM]



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