धीरे धीरे सब समझ जाएँगे ((लघुकथा ))
आज मालिक और ड्राइवर दोनो उदास और परेशन से नज़र आ रहे हैं . दोनो कुछ अपने ही सोच मे डूबे हुए हैं . दोनों के चेहरे पर चिंता की सिलवटें एक जैसी है (राज बाद में खुलेगा .. पढ़ते रहिये ) .२० मिनिट की लंबी यात्रा तक कोई बात नही हुई. दोनों का पूरा दिन बहुत बुरा...
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Gourav Agrawal
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[29 May 2010 21:30 PM]



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