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किस्सा-कहानी मेरे हमराह मेरा साया हैऔर तुम कह रहे हो, तन्हा हूँमैं ने सिर्फ एक सच कहा लेकिनयूं लगा जैसे इक तमाशा हूँ* * * * * * * * * * *आंधी से टूट जाने का खतरा नजर में थासारे दरख्त झुकने को तैयार हो गएतालीम, जहन, ज़ौक, शराफत, अदब, हुनरदौलत के सामने सभी बेकार हो... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना अवस्थी दुबे
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[29 May 2010 14:34 PM]

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