मेरा कमरा...जीवन

अंतर्द्वंद का आइना मेरा कमराऔर मेरी याददाश्तदोनों हैं भरेसड़ी घुटन से,उनके बीच मेंमैं रहता हूँ....बदलते मौसमऔर गुजरते दिनलाते रहे हैंकितने बदलाव,अच्छे और बुरेमैं छांटता हूँ...कडवी यादों कोमिटा सकूँजेहन सेकिसी तरह,इसी प्रयास मेंमैं रहता हूँ...सुनहले पलों कोघर में अपनेसजा... [पूरी पोस्ट]
writer knkayastha

Hindi-Poems

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[29 May 2010 13:49 PM]

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