खूबसूरत लड़की का चेहरा, तीस डिग्री पर खिला चाँद और कुछ यादें

हथकढ़ सुबह आठ बजे उठा था. उसके बाद दिन जाने किन ख़यालों में बीता, याद नहीं. आँधियाँ मेरे यहाँ तुम्हारी मुहब्बत की राहत की तरह बरसती है. विरह का तापमान कुछ एक डिग्री गिर जाया करता है फिर मैं मुहब्बत की सौगात फाइन डस्ट को पौंछता फिरता हूँ. वह हर जगह उतर आती है... [पूरी पोस्ट]
writer hathkadh
views
19
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
0
[29 May 2010 13:42 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix