आँधियों से कह दो औकात में रहा करे .............(धमकी नही करवाई करें )...............मैं करता हूँ ब्लोगिंग में संगठन का विरोध
"साख से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हमआँधियों से कह दो औकात में रहा करे "..ये इस लाइन को सुनकर , पढ़ कर मेरा हौसला बढ़ता है....वैसे भी खुद का आत्मविश्वास होना जरुरी है....मुझे को ब्लोगर कुछ भी कहे पर पर मैं जो भी लिख रहा हूँ ....उस पर कायम हूँ...
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neeshoo
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[29 May 2010 13:14 PM]



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