अलविदा दोस्तो, जिन्दगी रही तो हजार मुलाकातें

खुली खिड़की हैप्पी तेरा फोन, पास बैठे मेरे मित्र यशपाल शर्मा ने फोन को मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा। मैंने फोन को थामते हुए..हैल्लो हैल्लो किया, सामने से संदीप सर की आवाज आई, "हैप्पी तुमको आज दो बजे जयदीप सर ने रॉल्टा बजाज वाली बिल्डिंग में बुलाया है। मैं सीट से उठा, और... [पूरी पोस्ट]
writer Kulwant Happy

वेबदुनिया

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[29 May 2010 13:24 PM]

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