आता है प्यार
दौड़ते हाथी की पीठ पर तुम्हें हंसता देखा था स्टेडियम के गोल मैदान पर खिंचे चॉक की फांक पर दौड़ता, बीच दौड़ गिरता देखा था सपने में दीखी हों नीली पहाड़ियां, उसकी घुमराह रपटीली लाल पगडंडियों पर अबूझ खुशियों में नहाया, भागते देखा था. सपनों के ज़रा, एकदम...
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Pramod Singh
मन की गांठ
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[29 May 2010 12:40 PM]



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