A poetess blog
कागज़ को प्यार से सहलाकरखुशबुओं से नहलाकरसोचती हूँ लिखूकोई प्यार भरा गीतजिसमे तारों भरे आसमान तलेजुगनू टिमटिमाते होहवा के झोंके जहाँ बिना किसीखिड़की, दरवाज़े से टकराए हुए आते होंजहाँ एक दूसरे के सुख से बढ़करकोई चाह न होजहाँ अलग कर देने वालीकोई राह न होजहाँ...
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ranjana
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[29 May 2010 12:57 PM]



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