कविता :बर्बाद हो रही बिजली
बर्बाद हो रही बिजलीरोड़ों पर जल रही है बिजली ।देखो कितनी बर्बाद हो रही है बिजली , बिजली को पाने के लिए ।होते रहते शहर-गाँव में धरने तमाम ,फिर क्यों रोड़ों पर जला रहे दिन में । कितनी सारी बिजली ,बिजली से ही चल रहे कूलर येसी आदि । इसलिए हो रही बिजली की...
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BAL SAJAG
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[29 May 2010 11:56 AM]



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