झुकता उनके कृत्य से मानवता का भाल

तीखी नज़र लेकर झंडा लाल जो करें धरा को लालझुकता उनके कृत्य से मानवता का भालमानवता का भाल चाल है निर्मम शातिरनिरपराध मर रहे रेल में विवश मुसाफिरदिव्यदृष्टि अफसोसनाक उनका हथकंडाकरें धरा को लाल लाल जो लेकर झंडाबनियागीरी छोड़ कर मनमोहन जी आपनक्सलियों के मर्ज को समझें... [पूरी पोस्ट]
writer दिव्यदृष्टि
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[29 May 2010 09:25 AM]

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