कुदरत के नज़रों की खूबसूरती का बयां करते हुए भी बने कई नायाब गीत
ओल्ड इस गोल्ड /रिवाइवल # ३९ दिलीप कुमार के पार्श्वगायन की अगर बात करें तो सब से पहले उनके लिए गाया था अरुण कुमार ने उनकी पहली फ़िल्म 'ज्वार भाटा' में। उसके बाद कुछ वर्षों के लिए तलत महमूद बने थे दिलीप साहब की आवाज़। बाद में रफ़ी साहब की आवाज़ ही ज़्यादा...
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सजीव सारथी
sujooi chatterjee
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[29 May 2010 09:00 AM]



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