लोकतंत्र की राह के कांटे
लोकतंत्र की राह के काँटेवीरेन्द्र जैनहमारे देश में लोकतंत्र ने कुछ इस तरह से अपनी जगह बनायी है जैसे कि रेल के जनरल डिब्बे में चार लोगों के बैठने की सीट पर पहले से ही छह लोग बैठे होते हैं और सातवाँ व्यक्ति अपनी बीमारी बुढापे या किसी अन्य दयनीयता का...
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वीरेन्द्र जैन
समाज
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[29 May 2010 08:49 AM]



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