सांस म जीव लेवा धुंगिया

गुरतुर गोठ आज मौसम परिवर्तन के मार झेलत मनखे अचरज खा गे जब बसंत रितु म जाड़ ह अपन डेरा जमाय हावय। बरसात म गर्मी झेलत मनखे मौसम के पीरा ल सहत हावय। मौसम खुदे अचरज म हावय के मोर दिसा कइसे बदल गे हावय। इही सुग्घर साफ पर्यावरन ल करिया करत हमर विकास के रद्दा मलेगइया ये... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari

सुशील भोले

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[29 May 2010 08:40 AM]

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