कुछ सूफियाना सा..

शीर्षक.. इस बार कुछ शेर हैं, जिन से बात शुरू करता हूँ..तू सुन के मेरी इल्तिज़ा क्या करेगाजो पहले से सोचा हुआ था, करेगा ... औरआइना तुम भी हो, आइना मैं भी हूंदेखूं तो आती है लौट कर रोशनीमौला ऐसा सलीका हमें बख्श देहम लुटाते रहें उम्र भर रोशनी... ...शेर हमारे साथी... [पूरी पोस्ट]
writer विवेक.

सूफि‍याना

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[29 May 2010 08:12 AM]

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