संवेदना ख़त्म हो चुकी है हमारे में !!!

Alag sa कभी बेंगलूर, कभी दिल्ली, कभी हवाई जहाज, कभी बस, कभी रेल।वही वहशत, वही दरिंदगी, वही हैवनियत, वही बेगुनाहों की लाशें, वही मौत का नंगा नाच। वही आंकड़ों का जमा खाता। वही नेताओं के रटे-रटाए जुम्ले। वही दी जाने वाली धन राशि का एलान। जो मरे और जो सैकडों की तादाद... [पूरी पोस्ट]
writer Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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[29 May 2010 07:17 AM]

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