का साग खाए ले शुरू, मात जाथे बाद मा रमझाझर
जाड़ के दिन माँ येती बिहनिया के काम बूता करे के बाद घर गोसईनीन मन काय करै. एक दू घंटा सुतिन फेर चार साढ़े चार बजे संझा जुवार एक जघा जुरियाये लगिन. तहां ले शुरू गोठियाना. वइसे ये जुरियाना हा गाँव माँ का का होवत हे एखर खबर मिले के अस्थान घलो आय. भले ये खबर...
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सूर्यकान्त गुप्ता
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[29 May 2010 06:29 AM]



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