गुमसुम [लघुकथा] - सुधा भार्गव
चार वर्ष का नन्हा टोडी- “माँ का दुलारा, बाबा का प्यारा, बहन का निराला राजा भैया|” पॉँच वर्ष का होते ही वह स्कूल जाने लगा| तब से ये सारे विशेषण छू-मंतर हो गये| स्कूल जाते समय माँ हिदायत देती - कायदे से रहना| नन्हा समझ न पाया - कायदा किसे कहते हैं| बाबा...
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[29 May 2010 03:30 AM]



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