ये हादसों की इमारत !

hindigen ये जिन्दगीहादसों की इमारत है,जिसकी एक एक ईंट के  तले दबेइस जिन्दगी केकुछ न भूलने वाले हादसे ही तो हैं.इसको आकार देने मेंकभी मन सेकभी बेमन सेदायित्वों को ओढ़े ख़ामोशी सेयंत्रवत सक्रियये हाथ और पैर चलते रहे . मष्तिष्क और ह्रदय मेरी... [पूरी पोस्ट]
writer रेखा श्रीवास्तव
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[29 May 2010 03:26 AM]

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