ग्रहण का सच
अप्रैल 2010 की यूनिकवि प्रतियोगिता की शीर्ष 10 कविताओं से आगे बढ़ते हैं। 11वीं सुमीता प्रवीण केशवा की है। सुमीता इससे पहले भी हिन्द-युग्म पर प्रकाशित हो चुकी हैं।कविताः यह ग्रहण नहीं, है पाणिग्रहणहाँ, चाँद हूँ मैं...जैसे चन्द्रमुखी थी एकऔर हे सूर्यदेव,...
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[29 May 2010 03:14 AM]



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