धागा हूँ मैं

zakhm धागा हूँ मैं मुझे माला बना प्रीत के मनके पिरोनेह की गाँठें लगा खुद को सुमरनी का मोती बना मेरे किनारों को स्वयं से मिला कुछ इस तरहधागे को माला बनाअस्तित्व धागे कामाला बने माला की सम्पूर्णता में सजे जहाँ धागा... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[29 May 2010 01:23 AM]

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