नवगीत: सबकी साँसें...... --संजीव 'सलिल'
नवगीत:सबकी साँसें...संजीव 'सलिल' * क़ैद हुईं बुद्धू-बक्से में सबकी साँसें.....*नहीं धूप से अब है नाता.नहीं धूल का साथ सुहाता.नहीं हवा के संग झूमता-नहीं 'सलिल' में डूब तैरता.समय-पूर्व ही बच्चा भरताबड़ी उसाँसें.क़ैद हुईं बुद्धू-बक्से में सबकी साँसें.....*नहीं...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
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[29 May 2010 01:13 AM]



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