संत कबीर के दोहे-मनुष्य माया रूपी दीपक के इर्द गिर पतंगे कि तरह चक्कर काटता है

शब्दलेख सारथी संत कबीरदास जी के अनुसार---------------------------------माया दीपक नर पतंग, भ्रमि भ्रमि इवैं पड़ंतकह कबीर गुरु ग्यान तैं, एक आध उमरन्तइसका आशय यह है कि मनुष्य एक पंतगे की तरह माया रूपी दीपक के प्रति आकर्षण में भ्रमित रहता है। वह अपना जीवन उसी के इर्द... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

आध्यात्म

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[29 May 2010 01:17 AM]

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