सुंदरता को अपूर्ण ही होना चाहिए
रिमझिम झरती बूँदों कोबेधकर जब निकलीरवि-रश्मितो नीले आकाश परतन गयाइकहरा इंद्रधनुरे धनुतू भी है अभागासचमुच मेरी तरहजो सुंदर है किंतुसंपूर्ण नहींअपूर्ण हैक्योंकि तीर नहींसुंदर हैक्योंकि तीर नहींतीर का होनासंधान का होना हैऔर संधाननष्ट करता हैमिटाता है,...
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डॉ. राजेश नीरव
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[28 May 2010 23:00 PM]



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