सर ! मैं आपका जूनियर… आपको याद है?
विवाह की रंगीन संध्या और खाने पीने के शुभ अवसर पर हम भी पंडित जी के घर इकठ्ठी भीड़ में शामिल थे… भीड़ के कोलाहल से थोड़ी दूर बैठे हम अपनी बारी का इन्तज़ार कर रहे थे… साथ ही यह सोच भी रहे थे कि माता श्री की आज्ञा का पालन किया जाय, (जिसमें सबको खिलाने पिलाने...
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Manish
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[28 May 2010 21:48 PM]



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