दो मुक्तक
यादयाद बीते कीयाद आते कीजिंदगी कैसे कटीये तो मुझे याद नही.........अँधेरा खुद जला ...... दिये की रोशनी से सबअँधेरे को भगाते हैंअँधेरा खुद जला और मिट गयादेखा किसी ने ?...................... अरुण...
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Arun Khadilkar
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[28 May 2010 22:30 PM]



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