'पितृभाग' -यादवचंद्र के प्रबंध काव्य "परंपरा और विद्रोह" का षष्टम सर्ग
अनवरत के पिछले अंकों में आप यादवचंद्र जी के प्रबंध काव्य "परंपरा और विद्रोह" के चार सर्ग पढ़ चुके हैं। अब तक प्रकाशित सब कड़ियों को यहाँ क्लिक कर के पढ़ा जा सकता है। इस काव्य का प्रत्येक सर्ग एक पृथक युग का प्रतिनिधित्व करता है। युग परिवर्तन के साथ ही...
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दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
poet
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[28 May 2010 20:58 PM]



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