आईये आज आप को अपने गांव के अंदर घुमा लाये भाग अन्तिम
कल हम ने यही पर यह कडी छोडी थी, अभी हम यहां के कब्रिस्थान मै ही है, यह गांग के दुसरी ओर के कुछ घर है यह मुर्तियां एक पुरी दिवार जितनी है, शायद जब किसी को दफ़नाने आते हो तो यहां सब मिल कर कोई पुजा वगेरा करते होंगे, वेसे जब यह लोग किसी को दफ़नाने आते है तो...
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राज भाटिय़ा
मेरा देश मेरे लोग
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[28 May 2010 14:34 PM]



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