ये हरामज़ादे नौकर भी ऐसे ही हैं? (लघुकथा)

TRUTH (Collection of my poems) आज तो आप छा गये, क्या लच्छेदार बोले आप !! देखा नहीं लोग तालियाँ किस कदर पीट रहे थे. अजी ज़र्रानवाजी है आपकी. और आपने विषय भी तो ज़बरदस्त लिया था, वो क्या था! हाँ याद आया - "बाल मजदूरी समाज के लिये कलंक" जी हाँ! अच्छा अब मुझे इजाजत दीजिये. अरे... [पूरी पोस्ट]
writer M VERMA

छोटू

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[28 May 2010 14:39 PM]

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