दुआ

Ismat Zaidi आज पहली बार एक नज़्म ले कर हाज़िर हुई हूं , तजुर्बा कितना कामयाब है ये आप के तब्सेरों पर मुन्हसिर(निर्भर) होगा ,शुक्रिया दुआ----------------मेरे मालिक ख़यालों को मेरेपाकीज़गी दे दे ,मेरे जज़्बों को शिद्दत दे ,मेरी फ़िकरों को वुस’अत दे,मेरे एह्सास उस के... [पूरी पोस्ट]
writer इस्मत ज़ैदी
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[28 May 2010 14:06 PM]

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