कविता आइसर्कीम

BAL SAJAG आइसर्कीमआइसर्कीम हमें ला दो ,दो रूपया हमें दे दो.....दो रूपया मै ले जाउगा,बर्फ की सिली लउगा....बर्फ मै बनाऊगा,बाजार में बेचने जाऊगा.....पैसा कामऊगा,बर्फ की सिल्ली लाऊगा.....सबको आइसर्कीम खिलऊगा ,शरीर में ताजगी लाऊगा...आइसर्कीम मै खाऊगा.....लेखक मुकेश... [पूरी पोस्ट]
writer BAL SAJAG
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[28 May 2010 14:18 PM]

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