जितना गाओ घिंसता जाये जीवन का धुंधला संगीत।
***** जात-पात में धुलकर आयी ढोंगी जग की जीवन-रीत,मनु बड़ा या धर्म बड़ा, या सब से बड़ी मन प्रीत।।लाख करो हठ बंध ना पाये धन भंगुर का राग-मल्हार,जितना गाओ घिंसता जाये जीवन का धुंधला संगीत।कर्म से ओछेपन को ढक लो,गीली-मिट्टी गार सांधकर,बौनेपन से ढक ना पाये,...
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राजेन्द्र मीणा
जीवन-दर्शन
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[28 May 2010 12:10 PM]



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