अशोक वाजपेयी की कविता

जनपद हिन्दी के सुपरिचित कवि-आलोचक अशोक वाजपेयी की लगभग तीस बरस पुरानी यानी 1990 में लिखी यह कविता जीवन में जिन जरूरी चीजों को सहेजने की बात करती है, उससे भला कौन सहमत नहीं होगा? यहां जीवन को अपनी तरह से जीने और बरतने का भी मामला है। पढि.ए कविता-:: एक बार जो... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
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[28 May 2010 12:07 PM]

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