जिस दिन तुमसे मिलकर लौटी ....
जिस दिन तुमसे मिलकर लौटी मैं कविता में ढलने लगी थी| विचारों को मिल गए थे पंख चाय की हर चुस्की के साथ तुम्हारी कुछ पंक्तियाँ याद आ गई थीं| आटे में कुछ गीत चुपके से आकर गुँथ गए थे| नमक मिर्च हल्दी के साथ चटपटे, रंगीन एहसास सब्जी की कटोरी में घुल गए थे|...
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शेफाली पाण्डे
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[28 May 2010 10:07 AM]



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