गजल- बादल

अशोकनामा Shareबादल हैं आसमान में पानी लिए हुए मिटेंगे पहले इनकी उड़ान तो देखो टूटते तारों का गिरना है सच मगरटूटने वालों की रोशन शान तो देखो दो रोटियों के बदले आसीसता जहांकंगाल से फकीर का ईमान तो देखो लुटकर निभाता है साथ कहकहों कालुटे हुए का कीमती सामान तो देखो महल... [पूरी पोस्ट]
writer माणिक

ashok jamnani

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[28 May 2010 09:18 AM]

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