'ओ दहशतगर्द'

किन इशारों पे नाचते हो, दिन रात, गीत नफरत के गाये जाते हो,न पता नाम, न पहचान शक्लों की,फिर भी, दुश्मनी निभाए जाते हो,रौंद के बाग़, बसा दिए मरघट,मेले, लाशों के लगाये जाते हो,ये प्यास क्या, मांगे खून, हर पल,ये कैसी भूख, कि इंसान खाए जाते हो,जानें लेकर जो... [पूरी पोस्ट]
writer योगेश शर्मा
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[28 May 2010 09:27 AM]

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