आप के यहाँ भी बी.एस. एन. एल. है, भाई आप भी हिम्मती हैं.

Alag sa कुछ दिनों पहले सरकारी फोन 45 दिन तक कोमा में रहा था। डेस्क-डेस्क, केबिन-केबिन के यंत्रं पर पुकार लगायी पर वे भी तो अपने आकाओं से कम कहां है, सब मशीनी आवाज लिए बैठे होते हैं। सब को हिलाया, डुलाया, झिंझोड़ा पर सरकारी कछुआ अपनी चाल चलता रहा। हां इतना बदलाव... [पूरी पोस्ट]
writer Gagan Sharma, Kuchh Alag sa
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[28 May 2010 08:58 AM]

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