कुंए के मेंढ़क

ठाले बैठे... बस यूं ही... एक कुआं था साहब। पानी कम कीचड़ ज्यादा वाला। कुएं में करोड़ों मेंढ़क रहा करते थे। मेंढ़कों को कुएं का सभ्य एवं सम्मानित नागरिक होने पर बड़ा गर्व था। छाती फुलाए-फुलाए इतराकर यहां-वहां गाते फिरते थे, 'ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का, मस्तानों का.....इस... [पूरी पोस्ट]
writer ANURAAG MUSKAAN
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[28 May 2010 08:00 AM]

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