शुरू करो उपवास रे जोगी

यादों का इन्द्रजाल... Hindi Poetry by Sulabh जब तक चले श्वास रे जोगी रहना नज़र के पास रे जोगी बंधाकर सबको आस रे जोगी कौन चला बनवास रे जोगी हर सूँ फ़र्ज़ से सुरभित रहे घर दफ्तर न्यास रे जोगी सदियों तक ना प्यास जगे यूँ बुझाओ प्यास रे जोगी टूटे हिम्मत फिर से जुड़ेंगे खोना मत विश्वास रे जोगी जो भी पहना... [पूरी पोस्ट]
writer सुलभ § Sulabh
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[28 May 2010 07:54 AM]

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