याद बिल्कुल नहीं आते मुझे तुम

एक नीड़ ख्वाबों, ख्यालों और ख्वाहिशों का सोचते होगे केयाद आते हो मुझे तुमगलत हो तुमहमेशा की तरहमैं उनमें से नहींके यादों की गठरीसाथ बाँध  टहलू. गुज़रे को भूलवर्तमान को जीती हूईभविष्य का निर्माणआदत है मेरी.   कल एक कॉमन फ्रेंडसे मुलाकात हुईउसके साथ मिलतुम्हारी बुराई मेंपूरा दिन... [पूरी पोस्ट]
writer Priya

परिकल्पना में प्रकाशित

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[28 May 2010 07:49 AM]

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