रॉयल्टी के बहाने
मैं नहीं जानता था कि फेसबुक पर एक योजना के बारे में मेरा एक संदेह और लेखक के हित में सोचने की बात पर एक बहस इतना जोर पकड लेगी। मुझे लगा कि एक जवाब आएगा कि ये किताबें बिना पैसा लिए छापी गई हैं। जाहिर है भाई, माया ने यह खर्च वहन किया होगा या उनके सलाहकार...
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ramkumar singh
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[28 May 2010 06:48 AM]



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