किसी की आँख का आँसू!
आँख से आँसू किसी के यूं ही नहीं झरतेदर्द को पीकर जुबान जब थाम लेते हैं सिसकियों के खौफ सेगम को दबाते हीकिसी के आँख से रुकने का नहीं नाम लेते हैं.पार्क की एकांत बेंच परसुनसान सा कोना पकड़करचुपचाप पी गरल अपमान औ' तिरस्कार काइस...
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रेखा श्रीवास्तव
kavita
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[28 May 2010 06:41 AM]



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