मँहगाई
मँहगी सब्जी, मँहगा आटाभूल गए सब दालमँहगाई ने कर दियासबका हाल बेहाल।दूध सस्ता, पानी मँहगापेप्सी-कोला का धमालरोटी छोड़ ब्रेड खाओबहुराष्ट्रीय कंपनियों का कमाल।नेता-अफसर मौज उड़ाएंचलें बगुले की चालगरीबी व भुखमरी बढ़ेऐसा मँहगाई का जाल ।संसद में होती खूब...
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Akanksha~आकांक्षा
कविता
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[28 May 2010 06:34 AM]



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