यह प्रस्ताव केवल ब्लोगोत्सव-२०१० से जुड़े रचनाकारों एवं शुभचिंतकों हेतु है
अभी-अभी मैंने देखा कि पिछले पोस्ट में जब मैंने प्रथम अन्तराष्ट्रीय हिंदी बलोंग उत्सव का सुझाव तथा प्रस्ताव रखा तो किसी ने ब्लोगवाणी पर सबसे पहले नापसंद का चटका लगा दिया , इस पर अचानक मुझे मृदुला गर्ग की एक कविता की कुछ पंक्तियाँ याद आ...
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रवीन्द्र प्रभात
उन्नीसवां दिन
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[28 May 2010 02:44 AM]



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