वो सूरज को आंख दिखाता था: दिल्ली से योगेश गुलाटी

delhi se Yogesh Gulati करोल बाग मेट्रो स्टेशन के करीब एक मरियल सा रिक्षावाला तपती दुपहरी में रिक्षा खींच रहा था! फटी पैंट और एक बनियान बस यही था उसके तन पर! लू के थपेडों से बचने के लिये उसने अपने कान कपडे से ढक रखे थे! पैरों में टूटी सी चप्पल थी! गर्मी की इस दुपहरी में उसके... [पूरी पोस्ट]
writer Yogesh Gulati
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[28 May 2010 02:47 AM]

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